अध्यात्म से है देश की एकता- जूनापीठाधीश्वर अवधेशानंद

प्रयागराज। संस्कार भारती के गंगा मनुहार कार्यक्रम का समापन करते हुए जूनापीठाधीश्वर अवधेशानंद जी महाराज ने कहा कि देश में रंग रूप, वेषभूषा, खान-पान, रहन-सहन की तमाम विविधताओं के बावजूद देश केवल अध्यात्म के कारण जुड़ा हुआ और एक है। उन्होंने कहा कि हमारे तीर्थ और नाम उत्तर से दक्षिण तक और पूरब से पश्चिम तक के लोगों को एक सूत्र में बांधे रखते हैं। गंगा मनुहार कार्यक्रम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे देश की नदियों का जल त्रिवेणी संगम में लाकर संस्कार भारती ने देश की एकता को नई मजबूती दी है।

मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए अवधेशानंद महराज ने कहा कि कलाकार भी संतों की तरह साधक होते हैं। इनकी कला साधना भी अध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ी होती है। उन्होंने देशभर से इतने कला साधकों को एकत्रित करने के लिए संस्कार भारती के संस्थापक संरक्षक कला ऋषि पद्मश्री बाबा योगेन्द्र की सराहना की।

समारोह की अध्यक्षता कर रहीं भरतनाट्यम की विख्यात कलाकार पद्मविभूषण सरोजा वैद्यनाथन ने कहा कि धार्मिक आध्यात्मिक कुंभ में सांस्कृतिक कुंभ का आयोजन अद्भुत है। समापन समारोह को संबोधित करते हुए संस्कार भारती के संस्थापक संरक्षक पद्मश्री बाबा योगेन्द्र ने विस्तार से गंगा मनुहार कार्यक्रम की परिकल्पना बताई। समापन समारोह को प्रो. गिरीशचंद्र त्रिपाठी ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्कार भारती की स्थानीय अध्यक्ष कल्पना सहाय ने अतिथियों का स्वागत किया। विष्णु राजा ने ध्येय गीत गाया। अंत में कार्यक्रम के सह संयोजक अतुल द्विवेदी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डा. आभा श्रीवास्तव ने किया। समारोह के अंतिम चरण में पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से आए 108 कलाकारों ने मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियां दीं। समापन समारोह में संस्कार भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बांकेलाल, राष्ट्रीय महामंत्री अमीर चन्द, राष्ट्रीय संगठन मंत्री अभिजित गोखले, क्षेत्र प्रमुख सनातन दुबे, गिरीश मिश्र, डा. अभिनव गुप्त, डा. प्रदीप भटनागर, योगेन्द्र मिश्र, शैलेन्द्र मधुर, पंकज गौड़ सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

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